ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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पृथ्वी पर होने वाली बारिश में पानी की बूंदें गिरती हैं, लेकिन ब्रह्मांड में एक ऐसा ग्रह भी मौजूद है जहां वैज्ञानिकों का मानना है कि पानी नहीं, बल्कि नमक के कणों की बारिश हो सकती है। यह अनोखा ग्रह GJ 504b है, जो पृथ्वी से लगभग 57 प्रकाश वर्ष दूर स्थित है। अपने रहस्यमयी गुलाबी रंग और असामान्य वातावरण के कारण यह ग्रह वैज्ञानिकों के लिए लंबे समय से आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। हाल ही में नासा के जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) से मिले नए आंकड़ों ने इस ग्रह के वातावरण के बारे में कई रोचक जानकारियां सामने रखी हैं।
क्यों कहा जाता है इसे गुलाबी ग्रह?
GJ 504b को अक्सर "पिंक प्लैनेट" कहा जाता है। इसकी सतह और वातावरण से निकलने वाली मैजेंटा (गुलाबी-बैंगनी) जैसी चमक इसे अन्य ग्रहों से अलग बनाती है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह ग्रह अपेक्षाकृत युवा है और अभी भी अपने अंदर की अत्यधिक गर्मी बाहर छोड़ रहा है। यही भीषण तापमान इसके अनोखे रंग का प्रमुख कारण माना जाता है।
पानी नहीं, नमक के बादल बनने की संभावना
इस ग्रह का तापमान लगभग 260 से 370 डिग्री सेल्सियस (500 से 700 डिग्री फारेनहाइट) के बीच रहता है। इतनी अधिक गर्मी में पोटेशियम क्लोराइड जैसे खनिज ठोस अवस्था में नहीं रहते, बल्कि गैस बनकर वातावरण में फैल जाते हैं। जब ये गैसें ऊंचाई पर पहुंचकर ठंडी होती हैं, तो वे छोटे-छोटे ठोस कणों में बदल जाती हैं और नमक जैसे बादल बना सकती हैं। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इन बादलों से पानी की बूंदों की बजाय नमक के कण नीचे गिर सकते हैं।
वातावरण में मौजूद हैं खास रासायनिक तत्व
शोधकर्ताओं के मुताबिक GJ 504b के वातावरण में पोटेशियम क्लोराइड और जिंक सल्फाइड जैसे रासायनिक यौगिक बड़ी मात्रा में मौजूद हो सकते हैं। जब इन पदार्थों से बने बादल पर्याप्त घने हो जाते हैं, तो उनके कण गुरुत्वाकर्षण के कारण नीचे गिरने लगते हैं। इसी प्रक्रिया को वैज्ञानिक संभावित "नमक की बारिश" के रूप में देखते हैं।
बृहस्पति से भी कई गुना विशाल ग्रह
GJ 504b आकार के मामले में भी बेहद विशाल है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इसका द्रव्यमान बृहस्पति से लगभग 25 गुना अधिक हो सकता है। इसी वजह से इसे ज्ञात विशाल गैसीय एक्सोप्लैनेट्स में गिना जाता है। इसका विशाल आकार, अत्यधिक तापमान और अलग तरह की वायुमंडलीय संरचना इसे खगोल विज्ञान के सबसे दिलचस्प ग्रहों में शामिल करती है।
अभी शोध जारी है
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह निष्कर्ष ग्रह के वातावरण के विश्लेषण पर आधारित हैं। भविष्य में और अधिक अवलोकन तथा अध्ययन के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वहां वास्तव में नमक के कण किस प्रकार बनते और गिरते हैं।
GJ 504b हमारी पृथ्वी से बिल्कुल अलग दुनिया की झलक दिखाता है। गुलाबी रंग, अत्यधिक तापमान और नमक जैसे खनिजों से बने बादलों की संभावना इसे बेहद अनोखा बनाती है। ऐसे ग्रहों पर हो रहे अध्ययन न केवल ब्रह्मांड की विविधता को समझने में मदद करते हैं, बल्कि यह भी बताते हैं कि हमारी पृथ्वी जैसी दुनिया अंतरिक्ष में कितनी विशेष है।
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